पुराण विषय अनुक्रमणिका(ए-अः) Purana Subject Index

एकाकिकेसरी कथासरित् १८.४.४१ ( भिल्ल - सेनापति एकाकिकेसरी द्वारा विक्रमादित्य का सत्कार, एकाकिकेसरी द्वारा वानर की सहायता करने पर युवावस्था प्राप्ति की कथा, स्वकन्या मदनसुन्दरी को विक्रमादित्य को भेंट करना )

 

एकाङ्गी स्कन्द २.४.९.१४टीका ( हृषीकेश आभीर - कन्या, पिता द्वारा मिथ्या अपवाद सुनकर एकाङ्गी का त्याग, सत्यता ज्ञात होने पर पुन: स्वीकार करने की कथा ) 

 

एकाङ्घ्रि अग्नि ९६.११ ( आठ दिशाओं में स्थित क्षेत्रपालों में से सातवें क्षेत्रपाल ) 

 

एकाक्ष ब्रह्माण्ड २.३.६.१५ ( दनु के मनुष्यों से अवध्य पुत्रों में से एक ), वामन ५७.७३ ( यक्षों द्वारा कार्तिकेय को प्रदत्त गण का नाम ), ६८.१५ ( दनु के मनुष्यधर्मा राक्षस पुत्रों में से एक ), स्कन्द १.२.१३.१९२ ( शतरुद्रिय प्रसङ्ग में कर्कोटक नाग द्वारा हालाहल लिङ्ग की एकाक्ष नाम से आराधना )  Ekaaksha

 

एकाक्षा मत्स्य १७९.२५ ( एकाक्षी : अन्धकों के रक्तपान के लिए शिव द्वारा सृष्ट मातृकाओं में से एक ), वायु ४४.२० ( केतुमाल वर्ष की एक नदी )

 

एकाक्षरकोश अग्नि ३४८

 

एकादश अग्नि ३२१.३( ग्रहों के पूजन से सब ग्रहों के एकादशस्थ होने की प्रार्थना ), स्कन्द ५.३.१५९.२३ ( मृतक के एकादशाह में भोजन करने से श्वान योनि प्राप्ति का उल्लेख ) 

 

एकादशी अग्नि १८७ ( एकादशी व्रत का महत्त्व ), गर्ग २.२० ( एकादशी नामक गोपी द्वारा राधा को कङ्कण भेंट ), ४.८ ( २६ एकादशियों के नाम, एकादशी व्रत विधि, यज्ञ सीता रूपा गोपियों द्वारा एकादशी व्रत अनुष्ठान से कृष्ण की पति रूप में प्राप्ति ), १०.६१.४५ ( एकादशी व्रत विधि व माहात्म्य ), गरुड १.११६.६ ( एकादशी तिथि को ऋषियों की पूजा का निर्देश), १.१२३ ( कार्तिक शुक्ल एकादशी : भीष्म पञ्चक व्रत का निर्देश ; एकादशी, द्वादशी व त्रयोदशी का योग शुभ तथा एकादशी व दशमी का योग आसुरी होने का कथन ), १.१२५ ( एकादशी तिथि का माहात्म्य ; दशमी मिश्रित एकादशी के आसुरी और द्वादशी व त्रयोदशी मिश्रित एकादशी के दैव होने का कथन ), १.१२७ ( माघ शुक्ल एकादशी : भीम द्वादशी नाम, वराह न्यास ), १.१३५.४ ( एकादशी को ऋषि पूजा का निर्देश ; ९ ऋषियों के नाम ), ३.१४.२९(एकादशी को हरि का अन्न निःसार होने का कथन), नारद १.१९ ( कार्तिक शुक्ल एकादशी : ध्वजारोपण व्रत ), १.२१ ( मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी : हरिपञ्चक व्रत ), १.२३ ( एकादशी व्रत विधि व महिमा : गालव - पुत्र भद्रशील की कथा ), १.८८.१६९(एकादशी का स्वरूप), १.१२० ( मास अनुसार एकादशी नाम व विष्णु पूजा ), २.१ ( एकादशी माहात्म्य : मान्धाता - वसिष्ठ संवाद ), २.२ ( दशमी या द्वादशी से विद्ध एकादशी का निर्णय ), २.३ ( एकादशी माहात्म्य : रुक्माङ्गद राजा की कथा का आरम्भ ), २.३१.५२ ( एकादशी / द्वादशी पुण्य दान से काष्ठीला की मुक्ति की विस्तृत कथा ), २.३७ ( मोहिनी को दशमी विद्धा एकादशी के व्रत फल की प्राप्ति ), २.६१.४६  ( ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी : जगन्नाथ क्षेत्र में पुरुषोत्तम की पूजा ), पद्म ४.१५ ( एकादशी व्रत का माहात्म्य : वल्लभ की कलहप्रिया भार्या हेमप्रभा को स्वर्ग की प्राप्ति ), ५.९६.९९ ( यम द्वारा यज्ञदत्त ब्राह्मण हेतु प्रोक्त एकादशी माहात्म्य ), ६.३० ( कार्तिक शुक्ल एकादशी : संवत्सर दीप व्रत ), ६.३४ ( माधव द्वारा जाह्नवी को प्रोक्त त्रिस्पृशा एकादशी व्रत विधान : माधव का न्यास ), ६.३५ ( उन्मीलिनी एकादशी व्रत विधि व माहात्म्य : विष्णु न्यास ), ६.३६ ( पक्षवर्धिनी एकादशी का माहात्म्य ), ६.३८ ( एकादशी के जया, विजया आदि भेद, नक्त भोजन का माहात्म्य, एकादशी की विष्णु से उत्पत्ति व एकादशी द्वारा मुर दैत्य का वध ), ६.३९ ( मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी : मोक्षा नामक एकादशी का माहात्म्य :- वैखानस राजा द्वारा पितरों का उद्धार ), ६.४० ( पौष कृष्ण एकादशी : सफला नाम, लुम्भक राजकुमार की मुक्ति की कथा ), ६.४१ ( पौष शुक्ल एकादशी : पुत्रहा नाम, सुकेतुमान द्वारा पुत्र प्राप्ति ), ६.४२ ( माघ कृष्ण एकादशी : षट्-तिला नाम, विधि ), ६.४३ ( माघ शुक्ल एकादशी : जया नाम, माल्यवान व पुष्पदन्ती का पिशाच योनि से उद्धार ), ६.४४ ( फाल्गुन कृष्ण एकादशी : विजया नाम, राम द्वारा लङ्का पर विजय ), ६.४५ (फाल्गुन शुक्ल एकादशी :आमलकी नाम, परशुराम - पूजा ), ६.४६ (चैत्र कृष्ण एकादशी : पापमोचनी नाम, मञ्जुघोषा व मेधावी ऋषि की कथा ), ६.४७ ( चैत्र शुक्ल एकादशी : कामदा नाम, ललित गन्धर्व व ललिता अप्सरा का उद्धार ), ६.४८ ( वैशाख कृष्ण एकादशी : वरूथिनी नाम ), ६.४९  ( वैशाख शुक्ल एकादशी : मोहिनी नाम, धृष्टबुद्धि का उद्धार ), ६.५० ( ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी : अपरा नाम, माहात्म्य ), ६.५१( ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी : निर्जला नाम, भीम द्वारा चीर्णन ), ६.५२ ( आषाढ कृष्ण एकादशी : योगिनी नाम, हेममाली यक्ष का उद्धार ), ६.५३ ( आषाढ शुक्ल एकादशी : हरिशयनी नाम, वामन - पूजा ), ६.५४ ( श्रावण कृष्ण एकादशी : कामिका नाम, तुलसी पूजा ), ६.५५ ( श्रावण शुक्ल एकादशी : पुत्रदा नाम, महीजित् राजा को पुत्र प्राप्ति ), ६.५६ ( भाद्रपद एकादशी : अजा नाम, हरिश्चन्द्र को सुख प्राप्ति ), ६.५७ ( भाद्रपद शुक्ल एकादशी : पद्मा नाम, मान्धाता के राज्य में वर्षा ), ६.५८ ( आश्विन कृष्ण एकादशी : इन्दिरा नाम, इन्द्रसेन को पितरों सहित स्वर्ग प्राप्ति ), ६.५९ ( आश्विन शुक्ल एकादशी : पापाङ्कुशा नाम, माहात्म्य ), ६.६० ( कार्तिक कृष्ण एकादशी : रमा नाम, शोभन व चन्द्रभागा को दिव्य रूप व भोग प्राप्ति ), ६.६१ ( कार्तिक शुक्ल एकादशी : प्रबोधिनी नामक एकादशी का माहात्म्य ), ६.६२ ( पुरुषोत्तम मास, कृष्ण पक्ष एकादशी : कमला नाम, जयशर्मा दुष्ट ब्राह्मण का उद्धार ), ६.६३ ( पुरुषोत्तम मास, शुक्ल पक्ष एकादशी : कामदा नामक एकादशी का माहात्म्य ), ६.९०.१९ ( आश्विन शुक्ल एकादशी : वेदों व विष्णु का जल में शयन ), ६.९०.१९ ( कार्तिक शुक्ल एकादशी : समुद्र में सुप्त वेदों व विष्णु का प्रबोधन ), ६.११९ ( आश्विन शुक्ल एकादशी : मासोपमास व्रत ), ६.१२४ ( कार्तिक शुक्ल एकादशी : प्रबोधिनी नाम, माहात्म्य, भीष्म पञ्चक व्रत का आरम्भ ), ६.२३३ ( एकादशी माहात्म्य : देवों द्वारा लक्ष्मी के दर्शन ), ७.२२ ( एकादशी माहात्म्य : सर्व व्रतों में श्रेष्ठता, पाप पुरुष को एकादशी - अन्न में स्थान, व्रत विधि ), ब्रह्म १.१२० ( एकादशी को जनार्दन पूजा, गान, जागरण आदि कर्म, चाण्डाल - राक्षस प्रसंग ), ब्रह्मवैवर्त्त ४.२६ ( एकादशी व्रत विधान का कथन ), भविष्य ३.४.१६.३८ ( मुर दैत्य के वधार्थ एकादशी देवी की उत्पत्ति का वर्णन ), वराह ३०.६ ( वायु के मूर्तिमान रूप धनद को ब्रह्मा से एकादशी तिथि की प्राप्ति, एकादशी को अपक्व भोजन का महत्त्व ), १६४ ( भाद्रपद शुक्ल एकादशी को गोवर्धन परिक्रमा ), २११.४२ ( एकादशी माहात्म्य : शुक्ला एकादशी भक्तिप्रदा व कृष्ण एकादशी से मोक्ष प्राप्ति ), स्कन्द २.२.३६.१८ ( आषाढ शुक्ल एकादशी को पुरुषोत्तम शयन उत्सव का वर्णन ), २.४.३३ ( कार्तिक में प्रबोधिनी एकादशी का माहात्म्य ), २.५.१२ ( अखण्ड एकादशी व्रत विधि व एकादशी व्रत उद्यापन विधि ), ५.२.२८.४६ ( फाल्गुन शुक्ल आमलकी एकादशी का माहात्म्य : व्याध का अगले जन्म में राजा बनना ), ५.३.२६.१२१ ( , ५.३.५१.६ ( पौष शुक्ल एकादशी के मन्वन्तरादि तिथि होने का उल्लेख ), ५.३.५६.६५ ( चैत्र शुक्ल मदन एकादशी माहात्म्य के अन्तर्गत शबर द्वारा पद्म दान आदि से मुक्ति का वृत्तान्त ), ५.३.१८८.६ ( मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को नर्मदा तट पर शालग्राम तीर्थ में स्नान आदि का माहात्म्य ), ५.३.१८९.३६ ( ज्येष्ठ एकादशी को विष्णु के वराह रूप द्वारा पृथिवी के उद्धार का उल्लेख ), ६.९३ ( वैशाख शुक्ल एकादशी : गोमुख तीर्थ का आविर्भाव ), ६.१९० ( कार्तिक शुक्ल एकादशी : पंचरात्र का आरम्भ ), ६.२३१ ( कार्तिक शुक्ल एकादशी : विष्णु का वृक के ऊपर से उठकर क्षीरसागर को जाना, अशून्यशयन व्रत ), ७.१.२०८.३६ ( त्रयोदशी में एकादशी उपवास का पारण करने पर पातक का कथन ), ७.१.३०७ ( फाल्गुन शुक्ल एकादशी : अपर नारायण पूजा ), ७.२.१७.१९४ ( फाल्गुन शुक्ल एकादशी : आमलकी वृक्ष की प्रदक्षिणा ), ७.३.१३ ( कार्तिक शुक्ल एकादशी : अम्बरीष द्वारा हृषीकेश की आराधना ), ७.३.१९ ( माघ शुक्ल एकादशी : वराह तीर्थ में श्राद्ध ), हरिवंश २.३.९ ( आर्या / रात्रि देवी के कृष्ण पक्ष की नवमी व शुक्ल पक्ष की एकादशी होने का उल्लेख ), लक्ष्मीनारायण १.२४ ( एकादश इन्द्रियों से एकादशी की उत्पत्ति, महिमा ), १.२३०.३४ ( एकादशी व्रत, जागरण आदि की प्रशंसा ), १.२३३ ( तीन तिथियों में व्याप्त त्रिस्पृशा एकादशी व्रत की विधि व माहात्म्य ), १.२३४.७८ ( मुर दानव के वध हेतु एकादशेन्द्रिय रूपी एकादशी के प्राकट्य व विष्णु से विवाह का वर्णन ), १.२३५ ( उन्मीलिनी एकादशी व्रत विधि व माहात्म्य ), १.२३६ ( पक्षवर्धिनी एकादशी व्रत विधि व माहात्म्य ), १.२३७ ( एकादशी व्रत जागरण आदि की महिमा ), १.२३८.४७ ( मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी का माहात्म्य ), १.२३९ ( मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का माहात्म्य : वैश्वानर नृप द्वारा देववृत्ति हारक पितरों का उद्धार ), १.२४० ( पौष कृष्ण एकादशी का माहात्म्य : लुम्भक राजपुत्र को राज्य प्राप्ति की कथा ), १.२४१ ( पौष शुक्ल एकादशी का माहात्म्य : केतुमान राजर्षि को पुत्रलाभ ), १.२४२ ( माघ कृष्ण षट्-तिला एकादशी व्रत का माहात्म्य : कपिला नारी को देवीत्व व रमा पद की प्राप्ति ), १.२४३ ( माघ शुक्ल जया एकादशी व्रत का माहात्म्य : माल्यवान व पुष्पवती नामक गन्धर्व युगल की पिशाचत्व शाप से मुक्ति ), १.२४४ ( फाल्गुन कृष्ण विजया एकादशी व्रत का माहात्म्य : सहस्रार्जुन नाशार्थ तपोरत परशुराम की विजय ), १.२४५ (फाल्गुन शुक्ल आमलकी एकादशी व्रत का माहात्म्य : लक्ष्मी के ललाट के आभूषण रूप में आमलकी का प्राविर्भाव, पृथ्वी पर आमलकी पतन से वृक्ष की उत्पत्ति ), १.२४६ ( चैत्र कृष्ण पापमोचनी एकादशी व्रत का माहात्म्य : मञ्जुघोषा अप्सरा का मेधावी मुनि के शाप से पिशाची बनना, एकादशी व्रत से मुक्ति ), १.२४७ ( चैत्र शुक्ल कामदा एकादशी व्रत का माहात्म्य : पौण्ड्र के शाप से पिशाच बने ललित व ललिता गन्धर्व युगल की मुक्ति ), १.२४८ ( वैशाख कृष्ण वरूथिनी एकादशी व्रत का माहात्म्य : मरीचि - पत्नी कला के संग दोष से शिष्य वरूथ का उद्धार ), १.२४९ ( वैशाख शुक्ल मोहिनी एकादशी का माहात्म्य : धृष्ट बुद्धि वैश्य के उद्धार की कथा ), १.२५० ( ज्येष्ठ कृष्ण अपरा एकादशी व्रत माहात्म्य : अधोक्षज कृष्ण की पूजा, शलभा यतिनी की वानर गमन दोष से मुक्ति ), १.२५१ ( ज्येष्ठ शुक्ल निर्जला एकादशी व्रत का माहात्म्य : क्रतु ऋषि की क्षुधा शान्ति का वर्णन ), १.२५२ ( आषाढ कृष्ण योगिनी एकादशी व्रत का माहात्म्य : हेममाली यक्ष की कुष्ठ से मुक्ति ), १.२५३ ( आषाढ शुक्ल शयनी एकादशी व्रत माहात्म्य : वामन का अवतार व शयन, चातुर्मास के यम - नियम आदि व्रतों का पालन ), १.२५४ ( श्रावण कृष्ण कामिका एकादशी व्रत माहात्म्य : अच्युत - पूजा, श्रवण नामक पितरों को श्रवण सिद्धि की प्राप्ति, रति को काम की प्राप्ति ), १.२५५ ( श्रावण शुक्ल पुत्रदा एकादशी व्रत का माहात्म्य : श्रीधर पूजा, पुरूरवा के पूर्वजन्म का वृत्तान्त, एकादशी व्रत से पुत्र प्राप्ति ), १.२५६ ( भाद्रपद कृष्ण एकादशी व्रत का माहात्म्य : विश्वामित्र द्वारा हरिश्चन्द्र के सत्यव्रत की परीक्षा , अजा एकादशी व्रत से हरिश्चन्द्र के दुःखों की निवृत्ति ), १.२५७ ( भाद्रपद शुक्ल पद्मा एकादशी व्रत का माहात्म्य : शूद्र के तप के कारण वृष्टि से वंचित मान्धाता के राज्य में एकादशी व्रत से वृष्टि होना ), १.२५८ ( आश्विन कृष्ण इन्दिरा एकादशी व्रत का माहात्म्य : इन्द्रसेन राजा को पितरों सहित स्वर्ग की प्राप्ति ), १.२५९ ( आश्विन शुक्ल पाशाङ्कुशा एकादशी व्रत का माहात्म्य : वेधशिरा मुनि की यम पाश से मुक्ति ), १.२६० ( कार्तिक कृष्ण रमा एकादशी व्रत का माहात्म्य : चन्द्रभागा द्वारा पति शशिसेन सहित स्वर्गलोक की प्राप्ति ), १.२६१ ( कार्तिक शुक्ल प्रबोधिनी एकादशी व्रत का माहात्म्य : कर्मचाण्डाल विप्र व राक्षस की मुक्ति ), १.२६३  ( पुरुषोत्तम मास कृष्ण पक्ष कमला एकादशी व्रत का माहात्म्य : शाकाटयन विप्र को मणि की प्राप्ति ), १.२६४ ( पुरुषोत्तम मास शुक्ल धामदा एकादशी व्रत का माहात्म्य : कुमुद्वती द्वारा अक्षर धाम की प्राप्ति ), १.२६५ ( सर्व एकादशी व्रतों के उद्यापन की विधि ), १.२७६ ( एकादशी को पालनीय नियमों का वर्णन ), १.२८५+ ( दशमी विद्धा एकादशी के वर्जन का कारण : रुक्माङ्गद के एकादशी व्रत से यमलोक का शून्य होना, मोहिनी द्वारा रुक्माङ्गद के व्रत में विघ्न, मोहिनी को दशमी विद्धा एकादशी का फल प्राप्त होना ), १.३०३ ( अधिमास एकादशी व्रत का माहात्म्य : मूर्ति द्वारा दक्ष - पुत्री रूप में उत्पन्न होकर धर्म पति की प्राप्ति ), १.३१८ ( अधिमास एकादशी व्रत का माहात्म्य : वम्री का कृष्ण - पत्नी व १० प्रचेताओं की पत्नी बनना ), १.५४५.३६ ( राजा नृग के शरीर से एकादशी कन्या के निर्गत होकर दस्युओं का नाश करने का वृत्तान्त ), २.१५ ( ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी माहात्म्य : ९ कन्याओं द्वारा कृष्ण को पति रूप में प्राप्त करना ), २.५९.६६ ( विप्र द्वारा भाद्रपद एकादशी को दान से जन्मान्तर में प्रेत बनने पर दिव्य भोजन स्थाली आदि की प्राप्ति ), २.१२३.२८ ( मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी : शिबि राज्य में क्रतु का आरम्भ ), २.१२३.३१ ( पौष कृष्ण एकादशी : शक्त्यक्षि राजा के क्रतु का आरम्भ ), २.१९२ ( श्रावण कृष्ण एकादशी : श्री हरि का बललीन राजा की नगरी में आगमन ), २.२१२ ( एकादशी तिथि को श्री हरि द्वारा साधु द्वीप में राजा सहित यज्ञ की पूर्णाहुति देना ), २.२३९ ( पुण्डरीक राजा द्वारा कार्तिक एकादशी व्रत से हंस रूपी कृष्ण का दर्शन ), २.२४७ ( सोमयाग के चतुर्थ दिन एकादशी को करणीय कृत्यों का वर्णन ), ३.१०३.७ ( एकादशी को स्वर्ण गौ दान से रूप प्राप्ति ), ४.१०.९ ( श्रावण शुक्ल एकादशी : राजा नागविक्रम का सर्वमेध यज्ञ करना ), ४.४१.३ ( आषाढ एकादशी को रायहरि नृप द्वारा कथा आयोजन का वर्णन ), ४.४६.४२ ( ऊर्ज एकादशी को कुलालों के मोक्ष का वृत्तान्त ), ४.५८.५६ ( चैत्र कृष्ण एकादशी : षण्ढों की एकादशी जागरण से मुक्ति ), ४.७१.४३ ( वैशाख शुक्ल एकादशी : कीरतार भाट की मुक्ति की कथा ), ४.१०१.८९ ( कृष्ण - पत्नी, पुण्यव्रत व पतिव्रता युगल की माता ), महाभारत वन १३४.१८ ( ११ पशुओं के ११ विषय, ११ यूप, ११ विकार, ११ रुद्र होने का उल्लेख ), उद्योग २०.१८ ( कौरवों की एकादश अक्षौहिणी सेना तथा अकेले धनञ्जय की तुलना ), भीष्म ७.३६ ( गन्धमादन के पार्श्ववर्ती पर्वतों पर एकादश सहस्र आयु होने का उल्लेख ), १६.१५ ( कौरवों की ११ अक्षौहिणी सेना के शकुनि, शल्य, जयद्रथ आदि अधिनायकों के नाम ), १६.२५ (कौरवों की एकादश तथा पाण्डवों की सात अक्षौहिणी सेनाओं का उल्लेख ), शान्ति २३३.१७ ( एकादश विकारात्मा पुरुष के कलाओं से युक्त होने का कथन ), २५२.११ ( पांच महाभूत, भावना, अज्ञान, कर्म या अविद्या, काम, कर्म, नवम मन, दशमी बुद्धि तथा एकादशी अनन्तात्मा होने का कथन ), २८०.२० ( एकादश विकारात्मा के विराट रूप का वर्णन ),अनुशासन १०९, आश्वमेधिक ३६.२ ( बुद्धि स्वामी वाले एकादश परिक्षेप के मन व्याकरणात्मक होने का कथन ), ४२.१४ ( अहंकार से प्रसूत ११ इन्द्रियों श्रोत्र, त्वक्  आदि का वर्णन ; पांच कर्मेन्द्रिय, पांच ज्ञानेन्द्रिय, मन उभयत्र व बुद्धि द्वादशी ; इन्द्रिय ग्राम को जीतने पर ब्रह्म के प्रकाशन का उल्लेख )  Ekaadashee/  ekaadashi/ ekadashi

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