पुराण विषय अनुक्रमणिका(ए-अः) Purana Subject Index

एकपाटला ब्रह्माण्ड २.३.१०.८ ( मेना - पुत्री, जैगीषव्य - भार्या, शङ्ख व लिखित -माता ), वायु ७२.७ ( वही), ७२.१८ ( वही), हरिवंश १.१८.२४ ( वही)  Ekapaatalaa

 

एकपाद नारद १.६६.१३१( एकपाद गणेश की शक्ति रमा का उल्लेख ), ब्रह्माण्ड ३.४.२०.८२ ( किरिचक्र रथ पर स्थित १० भैरव श्रेष्ठों में से एक ), ३.४.४४.६८ ( गणेश के ५१ नामों में से एक ), स्कन्द ७.२.१५.२५ ( रैवतक पर्वत पर पांच क्षेत्रपालों में से एक, स्वरूप व प्रकृति का वर्णन ), हरिवंश ३.१७.१८( दिष्ट के ब्रह्मा का एक पाद होने का कथन )  Ekapaada

 

एकरुद्र नारद १.६६.१११( एकरुद्र की शक्ति त्रैलोक्यविद्या का उल्लेख )

 

एकलव्य ब्रह्माण्ड २.३.७१.१९० ( देवश्रवा - पुत्र श्राद्धदेव / शत्रुघ्न का जरा निषाद द्वारा पालन, एकलव्य नाम ), वायु ९६.१८७ ( वही), हरिवंश १.३४.३२ ( देवश्रवा के पुत्र शत्रुघ्न का नाम, पिता द्वारा त्याग होने पर निषाद द्वारा पालन ), ३.९४.२६ ( पौण्ड्रक - सेनानी, यादवों से युद्ध ), ३.९८+ ( एकलव्य का बलराम से युद्ध ), ३.१०२.१ (एकलव्य का बलराम से युद्ध व पलायन कर समुद्र में प्रवेश ), कथासरित् १२.२.१६३ ( लावण्यमञ्जरी नामक ब्राह्मण कन्या का आसक्ति के कारण एकलव्या नगरी में रूपवती नामक वेश्या रूप में जन्म ), १२.७.२४ ( एकलव्या नगरी में श्रुतधर राजा के पुत्र सत्यधर द्वारा स्व - अग्रज शीलधर के राज्य से निष्कासन की कथा )  Ekalavya

 

एकल्लवीरा स्कन्द ७.१.१७१ (एकल्लवीरा देवी का माहात्म्य :दशरथ द्वारा पुत्र प्राप्ति के लिए एकल्लवीरा के समीप शिव लिङ्ग की आराधना ) 

 

एकविंशति गणेश १.८०.२२ ( कार्त्तवीर्य द्वारा एकविंशति बाणों से जमदग्नि की हत्या के कारण रेणुका द्वारा एकविंशति बार पृथिवी को क्षत्रिय हीन करने का निर्देश ), ब्रह्माण्ड २.३.३०.२८( पति की मृत्यु पर रेणुका द्वारा त्रि:सप्त बार हस्त से उदर के ताडन का उल्लेख ), स्कन्द १.२.६.१४( महीसागर सङ्गम पर चोरों द्वारा षोडश व एकविंश धन की चोरी का उल्लेख ) Ekavimshati

 

एकवीर देवीभागवत ६.२०+ ( हय रूपी विष्णु व वडवा रूपी लक्ष्मी - पुत्र, तुर्वसु / हरिवर्मा द्वारा पालन, हैहय उपनाम, एकावली की कालकेतु दानव से रक्षा व विवाह, कृतवीर्य - पिता ) 

 

एकवीरा देवीभागवत ७.३० ( सह्याद्रि पर विराजमान देवी का नाम ), मत्स्य १३.४० ( वही), १७९.१७ ( अन्धकों के रक्तपानार्थ शिव द्वारा सृष्ट मातृकाओं में से एक ), स्कन्द ५.३.१९८.७७ ( सह्याद्रि पर उमा की एकवीरा नाम से स्थिति का उल्लेख )  Ekaveeraa

 

एकशाला स्कन्द ५.३.२१२.२ ( शिव द्वारा भिक्षु रूप धारण करके एकशाला ग्राम में जाने का वृत्तान्त )

 

 

एकशृङ्ग वराह ८१.४ ( मेरु के परित: स्थित एकशृङ्ग पर्वत पर चतुर्मुख ब्रह्मा के वास का कथन ), वायु ३६.२४ ( मेरु के दक्षिण में स्थिति एक पर्वत ), महाभारत शान्ति ३४२.९२(एकशृङ्ग वराह द्वारा भूमि के उद्धार का उल्लेख), 

 Comments on Ekashringa

एकशृङ्गा ब्रह्माण्ड २.३.१०.८७ ( द्विजों द्वारा पूजित पितरों की मानसी कन्या योगोत्पत्ति का उपनाम, शुक्र - भार्या, भृगु वंश ), हरिवंश १.१८.५८ ( सुकाली नामक पितरों की मानसी कन्या, स्वर्ग में गौ नाम, शुक - भार्या, साध्य वंश )

 

एकश्रुत कथासरित् १.२.४०, ८०( सोमदत्त व वसुदत्ता - पुत्र के एकश्रुत होने का कथन ; एकश्रुत द्वारा वर्ष नामक विप्र से विद्या की प्राप्ति )